New Education Policy (NEP) 2020 in Hindi – नई शिक्षा नीति की पूरी जानकारी हिंदी में

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New Education Policy (NEP) 2020 in Hindi – नई शिक्षा नीति की पूरी जानकारी हिंदी में – दोस्तों आज SarkariExamhelp छात्रों के समक्ष नई शिक्षा नीति 2020 की सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में प्रस्तुत कर रहा है. New Education Policy 2020 से प्रतियोगी परीक्षाओं में अवश्य प्रश्न पूछे जायेंगे, इसीलिए आप सभी छात्रों को इस नई शिक्षा नीति 2020 की जानकारी अवश्य होनी चाहिए. जो छात्र UPSC, SSC , Civil Services, Railway, Banking, Police, CRPF, CTET, Teacher या अन्य किसी राज्य या केंद्र स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की तैयारी कर रहे है तो, उन्हें New Education Policy (NEP) 2020 in Hindi का लेख अवश्य पढ़ना चाहिए.

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अवश्य पढ़ें:

Contents

New Education Policy 2020 Details in Hindi

New Education Policy 2020 in Hindi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में 21वीं सदी के लिये नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा के साथ ही मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय (MHRD) का नाम बदल कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ कर दिया गया है. विश्व की सबसे बड़ी परामर्श प्रक्रिया आयोजित की गयी थी.

वर्ष 2030 को हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी. विद्यालयी शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास कम से कम life skill होगी. बोर्ड एग्जाम को दो भाग में बांटा जाएगा. विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड में  life skills को जोड़ा जाएगा Early Child Care एवं एजुकेशन के लिए Curriculum NCERT द्वारा तैयार होगा.Foundational literacy एवं Numeracy पर नेशनल मिशन शुरु किया जाएगा. इसमें 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए विकसित किया जाएगा.

बुनियाद शिक्षा 6 से 9 वर्ष के लिए पढ़ाई की रुप रेखा 5+3+3+4 के आधार पर तैयारी की जाएगी. इसमें अंतिम 4 वर्ष 9वीं से 12वीं शामिल हैं. नये Extracurricular Activities को Main Curriculum में शामिल किया जाएगा. Gifted Children  एवं गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष प्रावधान किया गया है. New National Curriculum फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा जिसमें ECE स्कूल टीचर्स और एडल्ट एजुकेश को जोड़ा जाएगा. कक्षा 6 के बाद से ही वोकेशनल को जोड़ा जाएगा.यह महत्वपूर्ण है क्योंकि 34 वर्षो तक शिक्षा नीति में कोई बदलाव नही हुए

New Education Policy 2020 Key Highlights in Hindi

  • नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का ऑफर दिया जाएगा. यह संस्थान के लिए अनिवार्य नहीं होगा. राष्ट्रीय परीक्षाएजेंसी यह परीक्षा कराएगी.
  • स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षा भी नई शिक्षा नीति के दायरे में होगा
  • कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा. इन्हें सहायक पाठ्यक्रम नहीं कहा जाएगा.
  • चार साल का डिग्री प्रोग्राम फिर एमए और उसके बाद बिना एमफिल किए सीधा पीएचडी कर सकते हैं. इसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
  • पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धतियों को शामिल करने, ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग‘ का गठन करने और प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकने की सिफारिश की गई है.
  • कंप्यूटर, लैपटॉप और फोन इत्यादि के जरिए विभिन्न ऐप का इस्तेमाल करके शिक्षण को रोचक बनाने की बात कही गई है.
  • हर जिले में कला, करियर और खेल संबंधी गतिविधियों में भाग लेने के लिए एक विशेष बोर्डिंग स्कूल के रूप में ‘बाल भवन’ स्थापित किया जाएगा
  • एनसीईआरटी 8 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (एनसीपीएफईसीसीई) के लिए एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित करेगा. एक विस्तृत और मजबूत संस्थान प्रणाली के माध्यम से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) मुहैया कराई जाएगी. इसमें आंगनवाडी और प्री स्कूल भी शामिल होंगे.
  • राज्य वर्ष 2025 तक सभी प्राथमिक स्कूलों में ग्रेड 3 तक सभी शिक्षार्थियों या विद्यार्थियों द्वारा सार्वभौमिक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त कर लेने के लिए एक कार्यान्वयन योजना तैयार करेंगे. एकराष्ट्रीय पुस्तक संवर्धन नीति भी तैयार की जानी है.
  • विद्यार्थियों को पसंदीदा विषय चुनने के लिए कई विकल्प दिए जाएंगे. कला एवं विज्ञान के बीच, पाठ्यक्रम पाठ्येतर गतिविधियों के बीच और व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच कोई भिन्नता नहीं होगी.

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्यः Objectives of New National Education Policy

  • 2025 तक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा 3-6 वर्ष की आयु सीमा को मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के साथ सार्वभौमिक बनाना और 2025 तक सभी के लिए प्रदान करना हैं.
  • NEP ने 2030 तक 3-18 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य स्कूली शिक्षा में पहूंच और भागीदारी प्राप्त करने का एक उद्देश्य निर्धारित किया है.
  • स्कूली शिक्षा के चार चरणों में से प्रत्येक, एक सेमेस्टर या किसी अन्य प्रणाली की ओर बढ़ने पर विचार कर सकता है.
  • विज्ञान, गणित के अलावा शारीरिक शिक्षा, कला और शिल्प एवं व्यवसायिक कौशल, बढ़ईगीरी, बिजली का काम, धातु का काम, बागवानी, मिट्टी के बर्तन जैसे विषय पूरे स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किये जाएंगे.
  • 5+3+3+4 जो 3-18 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को कवर करता है. इसके तहत –  पांच साल का फाउंडेशन स्टेजः3 साल का प्री-प्राइमरी स्कूल और चरण 1, 2.- तीन साल की तैयारी / प्रायमरी चरण 3,4,5.- मध्य / उच्च प्राथमिक चरण 6,7,8. और – चार साल का उच्च / माध्यमिक चरण 9,10,11,12.
  • प्रत्येक छात्र कम से कम एक Vocational Course अनिवार्य किया गया है.
  • बचपन की देखभाल और शिक्षा पाठ्यक्रम की योजना – MHRD कार्यान्वयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय WCD महिला और बाल विकास HFW स्वास्थ्य और परिवार कल्याण 
  • 5 वर्ष की आयु से पहले हर बालक का ‘प्रारंभिक कक्षा’ या बालवाटिका कक्षा 1 से पहले जिसमें ECCE योग्य शिक्षक है.

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा में किये गये परिर्वतन

  • कॉलेजों के एक्रेडिटेशन के आधार पर ऑटोनॉमी दी जाएगी.
  • सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए शिक्षा मानक समान रहेंगे.
  • शिक्षा में तकनीकी को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • 5 साल के integrated course करने वालों को एम फिल नहीं करना होगा.
  • उच्च शिक्षा में अब मल्टीपल इंट् और एग्जिट का विकल्प दिया जाएगा.
  • तकनीकी के माध्यम से दिव्यांगजनों में शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • नेशनल एजुकेशन टेक्नॉलॉजी फोरम NETF की स्थापना की जाएगी.
  • ई- कोर्सेस 8 प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किये जाएंगे.
  • शिक्षा का माध्यम –घरेलू भाषा / मातृभाषा / स्थानीय भाषा / क्षेत्रीय भाषा होगी.
  • प्रायोगिक शिक्षण के रुप में हाथों पर सीखने, कला-एकीकृत और खेल-एकीकृत शिक्षा, कहानी आधारित शिक्षा शास्त्र, अन्य भी शामिल होंगे.
  • कक्षाएं योग्यता आधारित शिक्षा पर आधारित होगी.
  • स्वास्थ्य कार्ड जारी किएं जाएंगे.
  • प्रोढ़ शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रौध्धोगिकी-आधारित विकल्प जैसे ऐप, ऑनलाइन पाठ्यक्रम, ऑनलाइन किताबे, वयस्क शिक्षा केंद्र आदि विकसित किए जाएंगे.

भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग Higher Education Commission of India (HECI)

HECI के पास चार स्नतंत्र कार्य़ क्षेत्र है-

  • भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग HECI की स्थापना मेडिकल और कानूनी शिक्षा को छोड़ कर पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक रुप में की जाएगी.
  • NHERC नियमन के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा परिषद.
  • GEC मानक सेटिंग के लिए सामान्य शिक्षा परिषद.
  • HEGC वित्त पोषण के लिए उच्च शिक्षा अनुदान परिषद.और
  • NAC मान्यता के लिए राष्ट्रीय प्रत्यामन परिषद.

कस्तूरीरंगन ने कहा

“हमने एक ऐसी नीति निर्मित करने की कोशिश की है जो हमारी समझ में शैक्षिक परिदृश्य को परिवर्तित कर देगी ताकि हम युवाओं को वर्तमान और भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर सकें. यह एक ऐसी यात्रा रही है जिसमें हर सदस्य ने वैयक्तिक और सामूहिक रूप से हमारे देश के व्यापक शैक्षिक परिदृश्य के विभिन्न आयामों को शामिल करने की कोशिश की है. यह नीति सभी की पहुँच, क्षमता, गुणवत्ता, वहनीयता एवं जवाबदेही जैसे मार्गदर्शी उद्देश्यों पर आधारित है. पूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक हमने इस क्षेत्र को एक अविछिन्न निरंतरता में देखा है और साथ ही व्यापक परिदृश्य के इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया है.”

के.कस्तूरीरंगन
पूर्व प्रमुख, इसरो तथा शिक्षा नीति कमेटी के अध्यक्ष

New National Education Policy 2020 Point To Point 2020 in Hindi

मातृभाषा को बढ़ावा

  • पाँचवी कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान है.
  • विद्यार्थियों को स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में मानकीकृत किया जाएगा और बधिर विद्यार्थियों द्वारा उपयोग किए जाने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएगी.
  • संस्कृत को एक विकल्प के रूप में चुनने का अवसर प्राप्त होगा.
  • भारतीय संकेत भाषा (साइन लैंग्वेज) को देश भर में लागु होगा.
  • पालि, फारसी और प्राकृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय संस्थान, भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान की स्थापना.

2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात

  • वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) के साथ माध्यमिक स्तर तक एजुकेशन फॉर ऑल का लक्ष्य.
  • सकल नामांकन अनुपात (GER)- प्रदेश अथवा देश में स्कूली उम्र के कुल बच्चों और स्कूल में प्रवेश लेने वाले बच्चों का अनुपात.

नवीन शिक्षा केंद्रों की स्थापना

  • शिक्षा से दूर रह रहे दो करोड़ बच्चों को दोबारा मुख्यधारा में शामिल करने की योजना.
  • स्कूल के बुनियादी ढांचे का विकास और नवीन शिक्षा केंद्रों की स्थापना पर ज़ोर.

स्कूल पाठ्यक्रम में बदलाव

5 +3 + 3 + 4 क्या है?

स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढाँचे की जगह 5 +3 + 3 + 4 का नया पाठ्यक्रम ढाँचा लागू. यह ढाँचा क्रमशः 3-8 वर्ष, 8-11 वर्ष, 11-14 वर्ष और 14-18 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए. इसे समझने के लिए हम चार भागों में बाँट कर देख सकते हैं.

फाउंडेशन स्टेज:

  • 3 से 8 वर्ष तक के बच्चे कवर.
  • पहले तीन वर्ष के बच्चे आंगनवाड़ी एवं प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे.
  • अगले 2 वर्ष स्कूल में कक्षा 1 व 2 में पढ़ेंगे.

प्रीपेटरी स्टेज:

  • 8 से 11 वर्ष तक के बच्चे कवर.
  • कक्षा 3 से 5 तक की शिक्षा लेंगे.

मिडिल स्टेज:-3

  • 11 से 14 वर्ष तक के बच्चे कवर.
  • कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा लेंगे.

सेकेण्डरी स्टेज: –

  • 14 से 18 वर्ष तक के बच्चे कवर कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षा लेंगे. .
  • आसान होगी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं
  • परीक्षा दो बार कराने तथा वस्तुनिष्ठ और व्याख्यात्मक दो भागों में आयोजित करने का सुझाव.
  • विद्यार्थियों द्वारा रटे हुए सवालों पर बोर्ड परीक्षा का दारोमदार अब नहीं.
  • वार्षिक, सेमेस्टर और मॉड्यूलर बोर्ड परीक्षाओं के मॉडल पर जोर.

B.Ed कोर्स

  • जो विद्यार्थी 12वीं के बाद B.Ed करना चाहते हैं, वे 4 वर्ष का इंटीग्रेटेड B.Ed कोर्स कर सकते हैं.
  • स्नातक के बाद दो वर्ष का B.Ed जबकि परा-स्नातक उम्मीदवारों के लिए 1 वर्ष का B.Ed कोर्स होगा.

M.Phil की समाप्ति

4 साल का डिग्री प्रोग्राम, फिर M.A. और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा Ph.D कर सकते हैं.

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढाँचा

  • एनसीईआरटी द्वारा 8 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढाँचा विकसित करने पर बल.
  • बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान  प्राप्त करना.
  • वर्ष 2025 तक तीसरी कक्षा तक विद्यार्थियों के लिए सार्वभौमिक बुनियादी साक्षरता.

स्कूल के पाठ्यक्रम और अध्यापन कला में सुधार

  • 21वीं सदी के प्रमुख कौशल या व्यावहारिक जानकारियों से विद्यार्थियों का समग्र विकास . विद्यार्थियों को पसंदीदा विषय चुनने के लिए कई विकल्प दिए जाएंगे.
  • कला एवं विज्ञान के बीच, पाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच और व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विषयों के बीच सख्त रूप में कोई भिन्नता नहीं. इस नीति में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का विस्तार 12वीं तक करने का सुझाव.

समान और समावेशी शिक्षा

  • सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित समूहों को अवसर उपलब्ध करवाने पर बल.
  • बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों एवं समूहों के लिए बालक-बालिका समावेशी कोष और विशेष शिक्षा जोन की स्थापना का प्रावधान. दिव्यांग बच्चों को बुनियादी चरण से लेकर उच्च शिक्षा तक की नियमित शिक्षा प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम बनाया जाएगा.

प्रभावकारी शिक्षक भर्ती और स्कूल प्रशासन

  • शिक्षक भर्ती- प्रभावकारी और पारदर्शी प्रक्रियाओं द्वारा.
  • पदोन्नति – कार्य प्रदर्शन आकलन द्वारा.
  • बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं, शैक्षणिक पुस्तकालयों एवं प्रोफेशनल शिक्षक समुदाय की उपलब्धता पर जोर.
  • State School Standards Authority के गठन का प्रावधान.

उच्चतर शिक्षा

  • वर्ष 2018 के 26.3% के सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाकर 2035 तक 50% करने का लक्ष्य (व्यवसायिक शिक्षा सहित) उच्चतर शिक्षण संस्थानों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी.
  • Under Graduate शिक्षा के कार्य को 3 वर्ष से 4 वर्ष करने का प्रावधान.
  • 1 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर सर्टिफिकेट.
  • 2 वर्ष बाद पढ़ाई छोड़ने पर डिप्लोमा.
  • 3 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर बैचलर डिग्री.
  • 4 वर्ष के बाद शोध के साथ बैचलर डिग्री मिलेगी.
  • भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) का गठन (चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर).
  • महाविद्यालयों की संबद्धता अगले 15 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त की जाएगी तथा महाविद्यालयों को क्रमिक स्वायत्तता प्रदान करने हेतु एक तंत्र विकसित किया जाएगा.
  • .शोध को बढ़ावा देने हेतु एक शीर्ष निकाय के रूप में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी.

विद्यार्थियों के लिए वित्तीय सहायता

  • SC, ST, OBC और अन्य विशिष्ट श्रेणियों से जुड़े हुए विद्यार्थियों की योग्यता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा.
  • छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की प्रगति को समर्थन और उनकी प्रगति को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल का विस्तार किया जाएगा.

ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल शिक्षा

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के वैकल्पिक साधनों की तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए, स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों को ई-शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षा मंत्रालय में डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल कंटेंट और क्षमता निर्माण के उद्देश्य से एक समर्पित इकाई बनाई जाएगी.

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