Mangal Pandey Biography in Hindi | मंगल पांडे का इतिहास और जीवन परिचय

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Mangal Pandey Biography in Hindi – भारतीय स्वाधीनता संग्राम के प्रथम महानायक स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे जिन्होंने स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिनके नाम मात्र से अंग्रेज शासन काँप पड़ता था। जिन्होंने आम हिंदुस्तानी आजादी की लड़ाई में महानायक के रूप में सम्मान देता है। वह मंगल पांडे जो हर भारतीय स्वाधीनता सेनानियों के दिलों की धड़कन थे। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सेना में शामिल होकर उन्होंने अंग्रेजी शासन को चुनौती दिया। आज वह वीर पुरुष मंगल पांडे का पुण्य तिथि है। दोस्तों SarkariExamHelp में आपका स्वागत है, आज हम अपने ब्लॉग के माध्यम से क्रांतिकारी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे से जुड़ी जानकारी उनका जीवन परिचय लेकर आए हैं

जिसकी वीरता और कुर्बानी ने हमें आजादी का स्वाद चखाया उस आजादी के महानायक को SarkariExamHelp की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

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मंगल पांडेय – जीवन परिचय | Mangal Pandey Biography in Hindi

मंगल पांडे एक भारतीय स्वाधीनता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानी थे। आज भी आम हिंदुस्तानी उन्हें आजादी की लड़ाई में नायक के रूप में सम्मान देता है। तत्कालीन अंग्रेज शासन ने उन्हें बागी करार दिया था। जनता के समक्ष उनकी छवि बिगाड़ने के लिए भरपूर कोशिश की गई थी। किंतु भारतीय नागरिक यह जानते थे की अपनी जान की कुर्बानी देने वाला विद्रोही नहीं बल्कि देशभक्त ही हो सकता है।

Mangal Pandey Biography n Hindi
Mangal Pandey Biography n Hindi

मंगल पांडे का जन्म भारत की धरती में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के अंतर्गत नगमा गांव में 30 जनवरी 1831 को हुआ। पिता का नाम दिवाकर पांडे तथा माता का नाम अभया रानी है। भूमिहार ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाला यह बालक 22 साल की उम्र में ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हो गए ।

1857 का विद्रोह | Revolution of 1857 in Hindi

मंगल पांडे द्वारा लाई गई विद्रोह की चिंगारी पूरे भारत में बहुत ही कम समय में फैल गई। विद्रोह का प्रारंभ एक बंदूक की वजह से हुआ उस समय पैदल सिपाहियों को जो बंदूक दी जाती थी, वह पुरानी और कई दशकों से उपयोग में लाई जा रही थी। किंतु वह शक्तिशाली और अचूक की नई बंदूक में गोली दागने के आधुनिक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा था। लेकिन बंदूक में गोली भरने का जो तरीका था, वह पुराना था। उसके अनुसार गोली भरने के लिए करतूस को दाँतों से काटकर खोलना पड़ता था और उसमें भरे हुए बारूद को बंदूक की नली में डालना पड़ता था। उसका बाहरी आवरण में चर्बी होती थी, जो उसे पानी के सीलन से बचाती थी। सिपाहियों के बीच ऐसा अफवाह फैला था की करतूत में लगी हुई चर्बी सूअर और गाय के मांस का उपयोग करके बनाया जाता है।

revolution of 1857 in hindi
Revolution of 1857 in Hindi

मंगल पांडे ने उस बंदूक को लेने से इनकार कर दिया था। इसके परिणाम स्वरूप अंग्रेजों ने उनके हथियार छीन लिए और वर्दी उतार देने का हुक्म दिया। मंगल पांडे ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। तब 29 मार्च 1857 को उनकी राइफल छीनने के लिए अंग्रेज अफसर आगे बढ़ा उसी वक़्त मंगल ने उस पर आक्रमण कर दिया। मंगल पांडे के मदद के लिए साथियों की ओर देखा लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। मंगल पांडे ने हिम्मत नहीं हारे और उन्होंने अंग्रेजी अफसर ह्यूशन और लेफ्टिनेंट बॉब को मौत के घाट तत्काल उतार दिया। उसी वक्त मंगल पांडे को अंग्रेज सिपाहियों ने पकड़ लिया और उनका कोर्ट मार्शल का मुकदमा चलाया गया । 6 अप्रैल 1857 को फांसी की सजा सुनाई गई। फांसी की सजा 18 अप्रैल 1857 निर्धारित की गई।

1857 विद्रोह का परिणाम | Result of 1857 Revolt in Hindi

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर संपूर्ण अंग्रेजी शासन के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली बार क्रांति की ज्योति जलाई थी। भारत की आजादी की पहली लड़ाई 1857 के संग्राम की शुरुआत मंगल पांडे से ही हुई थी। मंगल पांडे द्वारा फैलाई गई विद्रोह की चिंगारी बुझी नहीं बल्कि एक महीने बाद देखते ही देखते पूरे उत्तरी भारत में फैल गया। अंग्रेजों को यह सीधा संदेश मिला कि अब भारत पर राज्य करना इतना आसान नहीं है, जितना कि पहले से वह समझ रहे थे। इस विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने भारत पर शासन करने के लिए 34735 अंग्रेजी कानून बनाए ताकि यहां की जनता पर लागू किए जा सके और कोई अन्य व्यक्ति मंगल पांडे जैसा दोबारा कोई सैनिक विद्रोह ना कर सके।

भारत की स्वाधीनता संग्राम में मंगल पांडे की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए भारत सरकार ने उनके सम्मान में सन 1984 में एक डाक टिकट भी जारी किया था

मारो फिरंगी को का दिया था नारा

मारो फिरंगी को यह नारा भारत की स्वाधीनता के लिए सबसे पहली आवाज उठाने वाले मंगल पांडे का है। मंगल पांडे को ही स्वाधीनता संग्राम के लिए सबसे पहले आवाज उठाने वाले क्रांतिकारी के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने फिरंगी नाम अंग्रेज यानी ब्रिटिश शासन को दीया ब्रिटिश शासन जो उस समय देश को गुलाम बनाए हुए था। आगे चलकर क्रांतिकारियों द्वारा उन्हें फिरंगी नाम से ही पुकारा जाता था। आपको बता दें कि गुलाम जनता और सैनिकों के दिल में क्रांति की ज्वाला जल रही थी। उस आग को जलाने और लड़कर आजादी लेने की इच्छा को दर्शाने वाले मंगल पांडे द्वारा ही यह नारा हर भारतीय की जुबान में था।

Mangal Pandey
Mangal Pandey

आपको बता दें कि मंगल पांडे को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। उनकी फांसी की सजा 18 अप्रैल सन 1857 को निर्धारित किया गया। किंतु बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे को अपने हाथों फांसी देने से इनकार कर दिया तब कोलकाता से चार अलग जल्लाद बुलाए गए और निर्धारित तिथि से 10 दिन पूर्व यानी 8 अप्रैल 1857 को जल्दी-जल्दी में फांसी दे दिया गया। भारत के वीर पुत्र ने आजादी की यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति हंसते-हंसते दे दिया।  


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