Netaji Subhas Chandra Bose Full History & Biography in Hindi | नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 23 January 2020

23 जनवरी शौर्य पुरुष: “नेताजी सुभाष चंद्र बोस” एक विहंगावलोकन | 23 JANUARY GALLANTRY : NETAJI SUBHASH CHANDRA BOSE AROVERIEW | नेताजी शौर्य के प्रतीक: NETAJI SYMBOL OF VALOR

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Netaji Subhas Chandra Bose Full History & Biography in Hindi– दोस्तों आज SarkariExamHelp आप सभी छात्रों के समक्ष “Netaji Subhas Chandra Bose” से सम्बंधित Biography, Story, Essay, Speech, Slogan, Dialogues, History, उनकी Death आदि जानकारी को इस लेख के माध्यम से शेयर कर रहा है। जैसा की आप सभी छात्र जानते है पूरा भारतवर्ष 23rd January को सुभाष चंद्र बोस जी का जयंती के रूप में मनाता है। अगर आप नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी जानकारी पढ़ना चाहते है तो, आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म (Birth) और विवाह (Marriage)

Netaji Subhas Chandra Bose Full History & Biography in Hindi | नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 23 January 2020
Netaji Subhas Chandra Bose Full History & Biography in Hindi | नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 23 January 2020

23 जनवरी 1897 में सुभाष चंद्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री जानकीनाथ बोस और उनकी माता का नाम प्रभावती था। उनके पिता कटक शहर के बहुत ही मशहूर और नामी वकील थे. अंग्रेजो की हुकूमत ने उन्हें रायबहादुर के ख़िताब से भी नवाजा था। सुभाष चन्द्र बोस ने 1942 में एमिली शैंकल (Emilie Schenkl) नाम की एक ऑस्ट्रियन महिला से बाड गास्तिन नामक स्थान पर हिन्दू पद्धति से विवाह किया था। सुभाष चन्द्र बोस की पुत्री का नाम अनीता बोस फाफ (Anita Bose Pfaff) है।

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हिंदुस्तान की आजादी के लिए अनेकों वीरों ने अपने आप को बलिदान (Sacrifice) की शूलियो पर चढ़ा दिया। हिंदुस्तान के स्वतंत्रता सेनानी तथा इनके सहयोगियों के बलिदानों को हम कभी नहीं चुका पाएंगे। परंतु इन तमाम स्वतंत्रता के पंक्तियों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी का योगदान सराहनीय है। वे इंग्लैंड (England) से आईसीएस (ICS) की परीक्षा पास कर के भारत लौट आए और अंग्रेजों की गुलामी Slavery तथा नौकरशाही के शोषक बनने से साफ इनकार कर दिया।

ख्वाब / ख्यालात DREAM /CARE

वह खून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं।

वह खून कहो किस मतलब का , आ सके देश के काम नहीं।

आजानू बाहु ऊंची करके, वो बोले रक्त  मुझे देना।

इसके बदले में भारत की आजादी तुम मुझसे लेना।|

वह आगे आए जो इस पर,  खूनी हस्ताक्षर देते हो।

मैं कफ़न बढ़ाता हूं आगे ,  जो इसको  हँसकर लेता हो।

जिनके ख्यालात और विचार ऐसे हो उसे अंग्रेजी हुकूमत Rule का दिया। वेतन किसी भीख से कम नहीं हो सकता। देशबंधु चितरंजन दास के द्वारा निकाले गए अग्रगामी पत्र का संपादन भार सुभाष जी ने अपने ऊपर ले लिया। सन 1921 में उन्होंने स्वयंसेवकों का संगठन प्रारम्भ किया। प्रिंस ऑफ वेल्स जब भारत आये समस्त भारत में उनका बहिष्कार कर दिया गया। सुभाष ने देशबन्धु चितरंजन दस के साथ बंगाल में इस आयोजन का नेतृत्व किया था। 25 अक्टूबर को उन्हें वर्मा के जेल (Mandalay Jail) में भेज दिया गया परंतु स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण 17 मई 1927 को उन्हें मुक्त कर दिया गया। कारावास (Imprisonment) से मुक्त होने के पश्चात मद्रास कांग्रेस अधिवेशन (The Session) के अध्यक्ष अंसारी ने उन्हें राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।

फारवर्ड ब्लॉक एम आजाद हिंद फौज :FORWARD BLOCK AND AZAD HIND FAUJ

सन 1934 में विदेश से लौटने पर वे त्रिपुरा कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित (Elected) हुए। इस अधिवेशन में अपने ओजस्वी (Powerful) भाषण से फेडरल योजना का घोर विरोध किया। सुभाष जी ने त्रिपुरा कांग्रेस अधिवेशन के सभापतित्व किया।

गांधी जी ने कांग्रेस छोड़ने की धमकी (Threat) दी, जो की सुभाष जी यह नहीं चाहते थे। इसलिए कुछ दिनों के बाद उन्होंने पद से त्याग किया। बाद में देश के अग्र विचार वाले तत्वों को एकजुट करने के लिए फारवर्ड ब्लाक नाम से अलग संगठन बनाया। कुछ समय पश्चात भारत रक्षा कानून के अंतर्गत उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने अपने समाधिस्त (Burial) होने की घोषणा कर दी थी तथा आधी रात के समय मौलवी के वेश में घर से बाहर निकल गए। वहां उत्तम चंद की सहायता प्राप्त करके एक मुसलमान के रूप में काबुल होते हुए जर्मनी पहुंचे। वहां उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया। विश्व के 19 राष्ट्रों ने आजाद हिंद फौज को स्वीकार कर लिया था।

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संप्रदायिक एकता :COMMUNAL UNITY

जय हिंद और दिल्ली चलो के नारों से इंफाल (Snowflake) कोहिमा क्षेत्र तथा पहाड़ियां गूंज उठी सुभाष चंद्र बोस साम्प्रदयिक एकता के प्रतीक थे। उन्होंने कभी जात पात धर्म में भेद नहीं किया, किंतु देखते ही देखते भारत में कुछ संप्रदायिक राजनीतिक दल स्थापित हो चुके थे। इन दोनों का संगठन धर्म के आधार पर किया गया था।

जहां एक ओर  सुभाष चंद्र बोस भारत को ब्रिटिश शासन (British Rule) से मुक्त करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वही चंद मुठ्ठी भर मुसलमान अपने सम्प्रदायों के हितों की रक्षा करने का दावा करते थे। उस समय राष्ट्रीय आंदोलन जोरों पर था। इन दलों को जनता का समर्थन प्राप्त नहीं हुआ और इनका अस्तित्व समाप्त हो गया।

अखंड भारत UNITED INDIA

जंग तो जंग है जंग के मैदान में हुआ करते हैं:

यह शहर की गोद में बारूद बिछाते क्यों हो ?

लगेगी आग मंदिर में तो जलेंगे मस्जिद:

यह समझते हो तो फिर आग लगाते क्यों हो?

मैं खून से भरे हुए खंजर तलाशता हूँ।

तन से जुदा जो हो गए वो सर तलाशता हूँ।

ईसा  की शक्ल में है जो खूंखार दरिंदे।

मैं ऐसे भेड़ियो  के लश्कर तलाशता हूँ।

सन 1937 में ही जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने दावा किया कि भारत के अंदर दो राष्ट्र हैं।एक हिंदू राष्ट्र और दूसरा मुस्लिम राष्ट्र। इस सिद्धांत का आश्रय लेकर जिस राजनीति का अनुसरण किया गया। उसके कारण अनेक दुखद घटनाएं Events हुई और अंत में देश का बंटवारा हुआ।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भी राष्ट्र सिद्धांत का विरोध किया और उन्होंने अखंड भारत का आग्रह किया। 21 अक्टूबर 1993 को उन्होंने स्वतंत्र भारत की अस्थाई सरकार की घोषणा की। सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की गतिविधियों ने देश में साम्राज्यवाद (Imperialism) विरोधी संघर्ष (Anti Conflict) को और मजबूत किया। 1945 में सुभाष ने भारत माता की बेड़ियों को काटने के लिए दूसरा भयानक आक्रमण किया, परंतु जर्मनी की हार के साथ आजाद हिंद फौज का भाग्य ही बदल गया और सैनिक गिरफ्तार कर लिए गए।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु (Death) कैसे हुई थी?

विमान द्वारा नेताजी जापान जा रहे थे। रास्ते में उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त (Accident) हो गया। 18 अगस्त सन 1945 के दिन यह घटना हुई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी का यह नारा अमर हो गया!!!

“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा”

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