14 सितंबर राष्ट्रीय पर्व – हिंदी दिवस

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भारत बहु भाषा भाषी देश हैः (India is a multi language speaking country)

Hindi Diwas 2020 in Hindi14 सितंबर(1949) वह शुभ दिन था जिस दिन भारतीय संविधान धारा 343 के अनुसार देवनागरी में लिखी जानेवाली हिंदी को ‘राजभाषा’ के रुप में स्वीकार किया था और यह संकल्प लिया गया था कि केंद्र सरकार का सारा राजकाज राजभाषा हिंदी मे चलेगा। भारत बहुभाषा भाषी देश है विभिन्न प्रदेशों की भिन्न भिन्न भषायें है और ये समृध्द भाषाएं हैं। यह उचित ही था और है कि इन प्रदेशों में वहां पर बोली जानेवाली भाषायें ‘राजभाषा’ के रुप में स्वीकार कर ली जायें, ताकि जनता को अपनी अपनी भाषा में वहां के राजकाज को चलते देखने का मौका मिले। हुआ भी यही अपवाद को छोड़कर सभी प्रदेशों ने आगे-पीछे अपने अपने प्रदेश की भाषा को राजकाज की भाषा बनाया। सम्पूर्ण जनता के लिए यह सन्तोष का विषय बना।

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राजभाषा और राष्ट्रभाषा का अर्थः (Official Language and Meaning of National Language)

हिंदी दिवस (Hindi Diwas)
हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

हिंदी एक ही क्यों, छः सात प्रदेशों की जन भाषा है। इसलिए इन प्रदेशों ने अपने अपने यहां हिंदी को राजभाषा के रुप में स्वीकार किया। राजभाषा का इतना ही अर्थ है कि उस भाषा मे सरकारी काम हो, और ‘राष्ट्रभाषा’ शब्द का प्रश्न है, वह बहुत ऊंचा अर्थ रखता है। उसका सम्बन्ध सम्पूर्ण राष्ट्र से है, राष्ट्र की भाषा ‘राष्ट्रभाषा’ कहलाती है। जिस राष्ट्र की कोई भाषा नहीं होती, वह राष्ट्र गूंगा कहलाता है। सम्पूर्ण राष्ट्र के जन जीवन में आदान प्रदान के लिए जो भाषा प्राप्त होती है उसे ‘राष्ट्रभाषा’ कहा जाता है। हिंदी के सम्पूर्ण भारत के सन्तों का आशीर्वाद मिला है,समपूर्ण जनता का समर्थन मिला है।

हिंदी राष्ट्रीय एकता की भावना हैः (Hindi is the spirit of national unity)

14 सितंबंर को सम्पूर्ण देश में ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है। उस दिन हम हिंदी के राष्ट्रीय रुप पर विचार करें, हिंदी का प्रचार मात्र एक भाषा का प्रचार नहीं है। वह एक भावना का प्रचार है, ‘राष्ट्र भाषा’ दो शब्दों के योग से बना है – राष्ट्र और भाषा, उसमें राष्ट्र शब्द प्रधान है। राष्ट्र की भावना का अर्थ है राष्ट्रीय एकता की भावना। इसी को प्राप्त करने के लिए भाषा को माध्यम बनाया गया है और वह भाषा है, सर्व मान्य ‘हिंदी’। हिंदी प्रचार की समस्याओं पर विचार विनिमय होता है हिंदी का प्रचार और कैसे व्यापक बने, मार्ग खोजे जाते है। राष्ट्रीय भावना से प्ररित होकर जब हम हिंदी दिवस मनायेंगे तब हमारा हिंदी दिवस मनाना सार्थक होगा। राष्ट्रीय एकता की दृष्टि से आज उसकी बड़ी आवश्यकता है।


निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय को सूल।। 

(भारतेंदूजी)

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