15 जनवरी तमिलनाडु का राष्ट्रिय पर्व पोंगल

NATIONAL FESTIVAL OF TAMILNADU : PONGAL 2020 पोंगल का अर्थ MEANING OF PONGAL

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15 जनवरी तमिलनाडु का राष्ट्रीय पर्व पोंगल (NATIONAL FESTIVAL OF TAMILNADU : PONGAL ) 2020 पोंगल का अर्थ (MEANING OF PONGAL) – दक्षिण भारत में स्थित तमिलनाडु राज्य में अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं। यहां का सबसे बड़ा त्यौहार है पोंगल तमिलनाडु का राष्ट्रीय पर्व है। इस समय तमिलनाडु में चावल की फसल पककर तैयार होती है। चावल की नई फसल (New Crop) को पाकर लोग बहुत प्रसन्न होते हैं और पोंगल के त्योहार को मनाते हैं।

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पोंगल का अर्थ

15 जनवरी तमिलनाडु का राष्ट्रीय पर्व पोंगल NATIONAL FESTIVAL OF TAMILNADU : PONGAL 2020 पोंगल का अर्थ MEANING OF PONGAL
15 जनवरी तमिलनाडु का राष्ट्रीय पर्व पोंगल NATIONAL FESTIVAL OF TAMILNADU : PONGAL 2020 पोंगल का अर्थ MEANING OF PONGAL

“पका  भात” होता है। यहां वर्षा ऋतु समाप्त होने पर नए चावल को पकाकर बांटा जाता है और अपने प्रसन्नता  को प्रकट (Appear) करने के लिए सूर्य देवता पर पोंगल  का प्रसाद चढ़ाते हैं।

पोंगल त्योहार 3 दिन मनाया जाता है – PONGAL FESTIVAL : CELEBRATED 3 DAYS

पहला दिन FIRST DAY

पूरे घर में झाड़ू लगाई जाती है पुरानी बेकार वस्तुओं को उठाकर कोने में रख दिया जाता है। घर के द्वारों को वंदनवार (Vandanavar)  फुल पत्तियों  (Flower leaves) आदि सजाया (Decorated) जाता है। शाम को दीप और लाइटिंग Lighting  से रोशनी की जाती है। खूब गाना बजाना नाचना होता है।विशेष रूप से भक्ति के गीत गाए जाते हैं। यह दिन देवराज इंद्र को अर्पित करता है क्योंकि वह वर्षा के देवता हैं।

दूसरे दिन SECOND DAY

पोंगल  वाले दिन सब लोग सुबह नदी समुंद्र सरोवर आदि में स्नान करते हैं नए कपड़े पहनते हैं फिर विशेष तरीके से घर में पोंगल  (भात) तैयार  करके  प्रसाद लगाकर उसको ग्रहण करते हैं। पोंगल (भात) खास तरीके से बनाया जाता है।
भात बनाने के लिए चूल्हा (Gas fire)  घर के आंगन (Ourtyard)  में या घर में बाहर रखा जाता है। चूल्हा  रखने से पहले उस स्थान पर रंगोली बनाई जाती है। मिट्टी का नया घड़ा लिया जाता है। उसकी गर्दन पर पत्तों के साथ हल्दी रखकर बांध देते हैं। फिर उसमें पानी और दूध डालकर चूल्हे पर रख दिया जाता है। उबाल आने पर चावल डालते हैं। उसमें शक्कर और मेवा डाल देते हैं। यह सब कार्य पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है जब भात पूरी तरह से पक  जाता है तब सब लोग पोंगल की जय बोलते हैं।

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तीसरा दिन THIRD DAY

इस दिन पशुओं का आदर किया जाता है। गाय बैलों को सजाया जाता है।उनकी पूजा व आरती की जाती है। उनके खेल (Play) किए जाते हैं। जैसे बैलों की लड़ाई, घोड़ो की दौड़ आदि इन्हें काबू में रखने के लिए इनके साथ युवक (Young boy) भी दौड़ते (Running) हैं। इनके प्रतियोगिताएं (Competition) भी होती हैं। धनवान लोग भेंट व् इनाम देते है। पूरे दिन हंसी खुशी का वातावरण रहता है।

इस तरह पोंगल का त्यौहार खूब उत्साह (Excitement) और उल्लास (Glee) के साथ मनाया जाता है।

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