GK/GSNASA'S Insight mission on Mars - मंगल पर नासा का इनसाइट मिशन

NASA’S Insight mission on Mars – मंगल पर नासा का इनसाइट मिशन

NASA’S Insight mission on Mars in Hindi – नासा ने मंगल ग्रह पर भेजे अपने इनसाइट लैंडर मिशन से जुड़े 6 शोधपत्र फरवरी, 2020 में प्रकाशित किए जिनमें पांच पत्र ‘जेयर‘ पत्रिका में जबकि एक शोधपत्र नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित हुए हैं, जिससे मंगल ग्रह पर तेज धूल भरी आंधियों के अलावा भूकंप आने तथा अज्ञात चुंबकीय तरंगों का पता चलता है जो मंगल ग्रह को एक जीवंत ग्रह होने का संकेत देते हैं

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अवश्य पढ़ें:

इनसाइट मिशन क्या है?

NASA'S Insight mission on Mars - मंगल पर नासा का इनसाइट मिशन
NASA’S Insight mission on Mars – मंगल पर नासा का इनसाइट मिशन

इनसाइट लैंडर मिशन को नासा द्वारा 5 मई, 2018 को प्रक्षेपित किया गया था जो 26 नवंबर, 2018 को मंगल ग्रह के ‘एलीशियम प्लानेशिया‘ नामक स्थल पर उतरा। इनसाइट ऐसा पहला अंतरिक्ष मिशन है जिसे मंगल ग्रह की सतह के नीचे की संरचना ज्ञात करने हेतु प्रक्षेपित किया गया है। इनसाइट लैंडर में मंगल ग्रह पर आने वाले भूकंपों को चिह्नित करने हेतु एक भूकंपमापी यंत्र (Seismometer) वायु की गति एवं दाब का पता लगाने हेतु सेंसर तथा एक मैग्नेटोमीटर समेत ग्रह का तापमान ज्ञात करने हेतु एक ताप प्रवाही अन्वेषण यंत्र भी लगाया गया है

मंगल पर भूगर्भीय हलचल के प्रमाण इनसाइट मिशन में स्थापित अतिसंवेदी भूकंपमापी यंत्र ने मंगल ग्रह की सतह के नीचे हल्के तथा नियमित रूप से कंपन होने के संकेत मिलने की पुष्टि की है। मंगल पर पृथ्वी के समान प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonic ics) नहीं पाये जाते परंतु इसके भीतर ज्वालामुखी विस्फोट के कारण भूगर्भीय कंपन के संकेत मिले हैं। मंगल पर सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्रों का भी पता चला है। परंतु मंगल पर सबसे शक्तिशाली भूकंप की तीव्रता केवल 4.0 मापी गई है

मंगल का चुंबकीय क्षेत्र:

इनसाइट खोजी यान मिशन पर एक मैग्नोमीटर स्थापित है जिसने मंगल पर चुंबकीय तरंगों को चिह्नित किया है।

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मंगल पर धूल भरी आंधियां:

इनसाइट में मंगल ग्रह पर चलने वाली हवा का दाब, गति का सटीक अनुमान लगाने के साथ साथ वहां पर हजारों की तादाद में तेज धूलभरी आधियां उठने की भी पुष्टि की है।

मंगल की कोर संरचना:

मंगल पर भेजे गए इनसाइट मिशन द्वारा इसकी ध्रुवीय गति से उत्पन्न होने वाले कंपन की तीव्रता का मापन करने हेतु यान पर स्थापित शक्तिशाली X-बैंड रेडियो यंत्र से इस तथ्य को ज्ञात किया जाएगा कि मंगल ग्रह का कोर ठोस है अथवा तरल है।


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