Citizenship Amendment Bill 2019: नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 क्या है? जाने पूरी जानकरी हिंदी में

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Citizenship Amendment Bill 2019 in Hindi-Hello दोस्तों SarkariExamHelp में आपका स्वागत है. आज के पोस्ट के माध्यम से हम आपको आज राज्यसभा में पेश हो रहा विधेयक जो काफी समय से चर्चा में है “Citizenship Amendment Bill 2019 : नागरिकता संशोधन विधेयक 2019″ के बारे में विस्तारपूर्वक बतायेंगे.

भारत अनेकता में एकता वाला देश हैं. भारत एक सेक्युलर देश होने की अपनी पहचान रखता है.शायद विश्व में भारत ही अकेला ऐसा देश है जहाँ संप्रभुता संपन्न और शांतिप्रिय देश होने के कारण ही अन्य देश के लोग भी यहाँ के नागरिकता पाने को आतुर है.

Citizenship Amendment Bill 2019: नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 
Citizenship Amendment Bill 2019: नागरिकता संशोधन विधेयक 2019

देश में पिछले कुछ दिनों में काफी आतंकी हरकत सामने आया. जिसमे घुसपैठियों का मामला काफी चर्चा में रहा. इसी समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहले असम में NRC यानी National Register of Citizens पर काम किया गया. लेकिन National Register of Citizens को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. विवाद था की बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को भारतीय नागरिकता सूचि से बाहर रखा गया है, जो देश के असल निवासी है.

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विवाद क्या है?

घुसपैठियों की समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहले असम में NRC पर काम किया गया. लेकिन NRC को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. विवाद था की बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को भारतीय नागरिकता सूचि से बाहर रखा गया है, जो देश के असल निवासी है.

साथ ही विपक्ष का आरोप है की Citizenship Amendment Bill में धर्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान है जो की सविधान के खिलाफ है. 3 देशों के 6 समुदाय के लोगों के अलावा मुसलमानों को भारत की नागरिकता नही दी जाएगी. विपक्ष का तर्क हैं कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है जो समानता के अधिकार देता है. यही भारत में विरोध की असल जड़ हैं.

नागरिकता संशोधन विधेयक आखिर है क्या?

Citizenship Amendment Bill नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रावधान है.  इसमें 3 देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए गैरमुस्लिम जैसे प्रमुख छह समुदायों –हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन, बौध्द तथा पारसी धर्मों के   प्रवासियों के लिए भारतीय नागरिकता नियम को आसान बनाना है. आसन सब्दों में ये समझा जा सकता हैं की 3 मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम शरणार्थीयों को भारत की नागरिकता देने की राह को आसन बनाना है. भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए अबतक कम से कम 11 साल से यहाँ रहना अनिवार्य है. अब इसी नियम को आसान बनाने के लिए इसकी अवधि को 11 साल से कम कर 6 साल किया जा रहा है.

अवैध प्रवासी कौन हैं?

1955,नागरिकता कानून के तहत अवैध प्रवासीयों का मतलब जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा के बिना ही प्रवेश किये हो या तो वैध यात्रा दस्तावेज के साथ भारत में आए और निश्चित अवधि से ज्यादा समय के बाद भी लौटे नही यही रुक जाएँ. कानून उन्हें अवैध प्रवासी मानता है, और उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती हैं.

विधेयक का क्या हुआ?

19 जुलाई 2016 को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया गया. 8 जनवरी 2019 को यह विधेयक लोकसभा में पास किया गया, किन्तु राज्यसभा में यह विधेयक पेश नही हो पाया. 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया है, इस कारण यह विधेयक दोनों सदनों में पास कराना पड़ेगा. इस बार फिर से सरकार इस विधेयक को शीतकालीन सत्र में ने सिरे से पेश करने की तैयारी में है. अब फिर से संसद के दोनों सदनों में ये विधेयक पास होने के बाद कानून बन जायेगा.

विपक्ष का आरोप

विपक्ष का आरोप है की Citizenship Amendment Bill में धर्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान है जो की सविधान के खिलाफ है.

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क्या दोनों सदनों में पास कराना जरुरी है?

संसदीय प्रकियाओ के नियम के मुताबिक, यदि कोई विधेयक लोकसभा में पारित हो जाता है, लेकिन राज्यसभा में नही पारित हो पाता है तो लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है. फिर विधेयक को प्रभाव में लाने के लिए फिर से विधेयक को दोनों सदनों में पास कराना होगा. लेकिन यदि राज्य सभा में विधेयक लंबित हो और लोकसभा में पास नही होता तो लोकसभा भंग हो जाने पर वह विधेयक निष्प्रभावी नहीं होता हैं. बात समझने वाली यह है की यह विधेयक राज्यसभा में पास नही हुआ है. 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया है, इस कारण यह विधेयक दोनों सदनों में पास कराना पड़ेगा.

आज सरकार द्रावारा राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया जा रहा है, यदि पास हो जाता है तो शरणार्थी हिन्दुस्तानी कहलायेंगे. 

पूर्वोत्तर के लोगों का क्या कहना है?

वैसे तो इस बिल को पुरे देश में लागू किया जाना है, किन्तु इसका विरोध पूर्वोत्तर राज्यों में हो रहा है क्यूंकि ये राज्य बांग्लादेश की सीमा से सटे है. पूर्वोत्तर के बड़े वर्ग का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक यदि लागू किया जाता है तो पूर्वोत्तर के मूल प्रवासी लोगो के सामने अपने पहचान और आजीविका का जनसँख्या का बहुत बड़ा संकट पैदा हो जाएगा.

नागरिकता संशोधन विधेयक का मकसद-:

3 मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम शरणार्थीयों (प्रमुख छह समुदायों -हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन, बौध्द तथा पारसी धर्मों के प्रवासियों ) को भारत की नागरिकता देने की राह को आसन बनाना है.

ध्यान दें -:

  • 4 दिसम्बर 2019 को केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में Citizenship Amendment Bill पेश की.
  • नागरिकता संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य प्रमुख छह समुदायों -हिन्दू, सिख, ईसाई,जैन, बौध्द तथा पारसी के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है.
  • 4 दिसम्बर 2019 को केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में Citizenship Amendment Bill पेश की.
  • मौजूदा कानून में बिल के जरिये संशोधन करना.
  • इस विधेयक में मुस्लिमों को शामिल नही किया गया है. यही वजह है की विपक्ष इस बिल को धर्म निरपेक्ष सिध्दांतों के खिलाफ है. यह कह कर इसकी आलोचना कर रहे है.
  • गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला विधेयक लोकसभा में पेश किया जा सकता है.
  • रोहिंग्याओं से जम्मू-कश्मीर निजात चाह्ता है.
  • नए विधेयक में अन्य संशोधन भी किये गये है. इस बिल में’ गैरकानूनी रूप से भारत में घुसे लोगों’ तथा पडोसी देशों में धार्मिक अत्याचारों का शिकार होकर भारत में शरण लेने वाले लोगों में साफ अंतर किया जा सके.
  • नागरिक संशोधन विधेयक का संसद के निचले सदन लोकसभा में आसानी से पारित हो जाना लगभग तय ही है, लेकिन राज्यसभा में यह पारित होना आसन नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार के पास बहुमत नहीं है.
    कुछ पार्टी इस बिल का विरोध में है तो वही कुछ पार्टी सरकार के पक्ष में संतुलन बनाये है.
  • बिल पर राज्य सरकार की मुहर लगते है 3 देशों के गैर मुस्लिम अल्पसंख्यको को भारत की नागरिकता पाना आसान हो जायेगा.
  • यह लगभग 126 वाँ संविधान संशोधन बिल होगा. जो की लोकसभा में पास हो गया है.

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